भगवान राम की यात्रा — वनवास, भक्ति और अंधकार पर प्रकाश की विजय।
राज्याभिषेक की पूर्व संध्या पर अयोध्या के युवराज को सिंहासन के बदले चौदह वर्ष का वनवास मिला — पिता के वर्षों पुराने दो वचनों के कारण। वे मुस्कुराए, प्रणाम किया, और नंगे पाँव निकल पड़े। पूरी नगरी रोती हुई पीछे चली।